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श्री राम नामधन (संग्रह) बैंक अजमेर 


-: शाखा प्रबन्धकों हेतु निर्देश एवं दायित्व :-


संस्था का मूल उद्देश्य मानव मात्र की राम नाम मन्त्र के लिखित जप करवाकर जीवन की पूर्णता प्राप्त करने हेतु प्रेरित करता है। यह मानव जीवन देव दुर्लभ हैं एवं मोक्ष प्राप्त का साधन है। प्रभु की असीम कृपा से प्राप्त इस शरीर में रहकर ही जीव प्रभु प्राप्ति मोक्ष जैसे पदार्थों को प्राप्त करने में सक्षम है एवं कलियुग में यह मात्र राम नाम जप से सहज है। परन्तु प्रत्येक मानव इस ओर से विमुख होकर नाना प्रकार के दु:ख देने वाले पदार्थों की प्राप्ति में ही लगा है। 

अत: मावन को सही मार्ग पर नियमित रूप से इस पावन जप यज्ञ में संलग्न कर मानव जीवन की सफलता हेतु प्रेरित करते हुए प्रत्येक मानव से 84 लाख लिखित राम नाम (तारक मन्त्र) के जप कराने के सफल प्रयास ही संस्था का मूल उश्य है। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु संस्था की ओर से नि:शुल्क रिक्त पुस्तकायें उपलब्ध कराने का स्वरूप भी संस्था का है जिसे विगत 09 वर्षों से संस्था निभाती ही है।

इस जप यज्ञ का विस्तार राष्ट्रीय स्तर पर शहर-शहर, गांव-गांव एवं गली-गली में पंहुचाने हेतु संस्था द्वारा शाखायें स्थापित करने का प्रावधान रखा गया है। एवं वर्तमान में 160 शाखायें स्थापित भी की है। एक नयी शाखा खोलने हेतु कृत संकल्पित है। 

जा भी मानव रूपकल्याण सहित राष्ट्र एवं राष्ट्र के समस्त मानवों के उद्धार में रूचि रखते है बना भेदभाव के इस संस्था के प्रबन्धक बनने हेतु आवेदन कर सकते हैं।

शाखा प्रबन्धकों की विशेष रूप से निम्नाकिंत नियमों पर कार्य नि:स्वार्थ भाव से करने होंगे एवं अपने दायित्व को निभाने का संकल्प लेना होगा।


नियमावली निम्नाकिंत है। 

1. प्रत्येक शाखा प्रबन्धक को प्रति वर्ष कम से कम 100 सदस्यों की इस पावन जप यज्ञ से जुड़ने का संकल्प दिलाना होगा।

2. सशपथ आवेदन कराते समय सदस्यता के चारों स्वरूप अच्छी तरह समझा कर क्रमांक एक आवश्यक रूप से एवं अन्य तीन स्वेच्छानुसार भरवाना होगा। आवेदन फार्म भरवाकर प्रधान कार्यालय भिजवाना एवं प्रधान कार्यालय द्वारा खाता संख्या आवंटित हो जाने पर खाता संख्या एवं पास बुक उन तक पंहुचाना एवं सदस्यों का नियमित रूप से रिक्त पुस्तिकाऐं देना एवं जमा कराना। रिक्त पुस्तिकाऐं पूर्ण होने पर अपने पास की बड़ी शाखा या प्रधान कार्यालय भिजवाना एवं प्रधान कार्यालय से रिक्त पुस्तिकाऐं मंगवाना। महत्वपूर्ण जिम्मेदारी शाखा प्रबन्धकों की होगी। साथ ही इसका पूर्ण रिकार्ड शाखा कार्यालय पर भी रखना होगा।
3. खाताधारी सदस्यों द्वारा जमा पुस्तिकाओं का प्रति पुस्तिका 25,000 मऩ पास बुक में जमा कर 84 लाख में से शेष निकलना होगा। एवं इसकी प्रविष्टियां शाखा रजि. में भी करनी होगी। जैसा कि पास बुक एवं शाखा रजि. का निर्धारित प्रारूप है। यह महत्वपूर्ण कार्य इस प्राथमिकता से हो कि प्रधान कार्यालय एवं शाखा कार्यालय के इन्द्राजों में एक मन्त्र का भी अन्तर नहीं आवें।
4. खाताधारियों को दी जाने वाली पासबुकों में दी गई कापियों एवं जमा कापियां का इन्द्राज दिनांक सहित करना होगा। एवं सम्भवत: जो संकल्पित सदस्य है मात्र उन्हें ही रिक्त पुस्तिकाऐं वितरण करें। इन्य सज्जनों को पुस्तिका वितरण कराना शाखा प्रबन्धक के स्व विवेक एवं जिम्मेदारी पर निर्भर करता है। 
5. एक समय में दो पुस्तिकाऐं ही देंवे या ज्यादा से ज्यादा पांच पुस्तिकाऐं खातेधारियों को नही दी जा सकेगी। परन्तु जैसे-जैसे जितनी जमा करायेंगे उतनी ही उन्हें पुन: रिक्त पुस्तिका देते रहेंगे। 
6. उपरोक्त समस्त गतिविधियों की प्रगति रिपोर्ट प्रतिमाह प्रधान कार्यालय को निर्धारित प्रपत्र भिजवायेंगे। एवं उनकी प्रतिलिपि क्षेत्रीय मुख्य शाखा पर भी भिजवायेंगे। यह अति आवश्यक तो है ही महत्वपूर्ण भी है। 
7. प्रतिवर्ष प्रधान कार्यालय के निर्देशानुसार वार्षिक उत्सव एवं शाखा संचालकों की बैठक में आवश्यक रूप से भाग लेना होगा। विशेष परिस्थिति में अपना प्रतिनिधि भिजवा सकेंगे। परन्तु उपस्थिति अनिवार्य होगी। 
8. (अ) अपने क्षेत्र की व्यापकता अनुसार एक या दो अपने अधीनस्थ सहायक तैयार करेंगे जो कि आपकी अनुपस्थिति में कार्य देख सके ऐसे व्यक्तियों की पूर्ण जानकारी पते सहित प्रधान कार्यालय को भिजवायेंगे।

(ब) अपने क्षेत्र से कोई भी उत्तम स्थान पर मिन्दर दुकान जैसा भी अनुकूल हो निश्चित कर प्रात: या सांय काल का सुविधानुसार समय निर्धारित कर बोर्ड लगायेंगे। जिससे कि आपकों एव सदस्यों को सम्पर्क में बाधा नहीं आये। एवं नियमित राम नाम लिखित जपकर्ता भक्तों का नियम भी खण्डित नहीं हो। यह अÌश्य परन्तु महान सेवा है। रिक्त पुस्तकाओं के अभाव में किसी भी प्रकार के नियम खण्डन पर सेवा का ऐच्छिक फल प्राप्त नहीं हो सकेगा।
9. (अ) अपने क्षेत्र से ऐसे सज्जनों से भी सम्पर्क करें जो कि प्रति वर्ष 1000 या 2000 रिक्त पुस्तिकाऐं नि:शुल्क वितरण हेतु संस्था की भेट करने की इच्छा रखते हो। परन्तु जो सज्जन इच्छा तो रखते हो परन्तु इतना खर्च वहन नहीं कर पाते हो उनसे सदस्यता क्रमांक चार में मासिक त्रैमासिक अर्द्ध या वाषिZक अनुदान भरवाने की सुविधाओं में अवगत कराये। 

(ब) रिक्त पुस्तिका दान कर्ताओं का नाम पता पुस्तिका कें अन्तिम पृष्ठ पर अंकित कराया जा सकेगा।
10. शाखा प्रबन्धक अपने क्षेत्र के रेलवे स्टेशन पूर्वी पश्चिमी रेलवे या किस ट्रांसपोर्ट से बिल्टी प्राप्त हो सकेगी उसका वर्णन अवश्य करेंगे जिससे कि रिक्त पुस्तिकाऐं भिजवाने में सुविधा रहें।
11. शाखा प्रबन्धकगण एक प्रति माह की अन्तिम तिथि तक का हिसाब प्राप्त रकम ड्राट कमिशन आदि काट कर बकाया राशि का ड्राट पोस्टल आर्डर संस्था के नाम से बनवा कर प्रेषित करेंगे केश राशि प्रेषित नहीं करें।
12. शाखा प्रबन्धक अपनी दो फोटो आवश्यक रूप से भेजेंगे जिसके कि परिचय पत्र जारी हो सके यह परिचय पत्र मात्र दो वर्ष तक की अवधि तक प्रमाणित रहेगा। दो वर्ष पश्चात् रीन्यू नवीनीकरण आवश्यक होगा।
13. किसी भी प्रकार की समस्या भक्तों के समक्ष आती नहीं है परन्तु भक्ति भावना पूर्णता प्राप्त करने तक यदि कोई आये तो शीघ्र प्रधान या मुख्य शाखा से सहयोग प्राप्त कर सकेंगे।
14. रिक्त पुस्तिकाऐं का पूर्ण विवरण प्रति वर्ष एक बार आवश्यक रूप से प्रधान कार्यालय को देना होगा यदि पुस्तिकाओं का हिसाब नहीं दे पाये तो 2 रू. प्रति पुस्तिक के हिसाब से शाखा प्रबन्धक द्वारा देय होगा। ये शुल्क संबंधित सदस्यों से प्राप्त कर सकेंगे।
15. विशेष - संस्थागत कार्यों के विकास एवं पहचान हेतु अपने क्षेत्र में प्रधान कार्यालय मन्त्री या अपने दो क्षेत्राधिकारी से लिखित सहमती प्राप्त कर विशेष कार्यक्रम भी आयोजित कर सकेंगे। जिसका विस्तृत विवरण पूर्व एवं पश्चात् का प्रधान कार्यालय को प्रेषित करना अनिवार्य होगा। अन्यथा प्रधान कार्यालय किसी भी प्रकार के सहयोग का उत्तरदायी नहीं होगा।

हमें पूर्ण विश्वास है कि आप उपरोक्त प्रस्तावों को ध्यान में रखते हुए अपने क्षेत्र एवं राष्ट्र कल्याण निर्मित इस पावन एवं तारक मन्त्र के लिखित जप में जन-जन को संलग्न का महान सेवा कार्य करते हुए अनन्त शांति उत्तम सुख एवं गौरवमय जीवन का रास्वादन करेंगे।


राम ब्रह्य परमार्थ रूपा 

जय सियाराम



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